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Friday, August 01, 2014


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शोकेस - शांतिनिकेतन
रवीन्द्रनाथ टैगोर ने 1901 में शांतिनिकेतन में एक छोटे-से स्कूल की स्थापना की। आगे 1919 में उन्होंने कला के एक स्कूल 'कला भवन' की नींव रखी जो 1921 में स्थापित विश्वभारती विश्वविद्यालय का एक हिस्सा बन गया। कलकत्ता शहर से दूर एक मनोहर स्थान पर अवस्थित कला भवन में कला प्रशिक्षण की एक वैकल्पिक पद्धति दी। इसमें स्टूडियो में बैठ कर चित्रकारी करने के बदले प्रकृति का अवलोकन करने एवं उसका एक हिस्सा बनने पर जोर दिया गया। लाल मिट्टी पर खड़े पेड़-पौधे, बदलते मौसम के रंग, जानवरों एवं चिड़ियों से भरे प्राकृतिक परिवेश ने विद्यार्थियों को कला की प्रेरणा दी और वे नंदलाल बोस जैसे दिग्गजों की देखरेख में काम करते रहे। आधुनिक भारतीय कला के विकास में नंदलाल सरीखे महारथियों की भूमिका उल्लेखनीय रही है।

मूल भाव एवं माध्यम दोनों में कला की विभिन्न रणनीतियों का इस्तेमाल करते हुए नंदलाल बोस, बी.बी. मुखर्जी और राम किंकर बैज जैसे कलाकारों की कृतियां भारतीय चित्रकला के उस दशक का इतिहास कहती हैं जब भारत स्वाधीनता की लड़ाई में संलग्न था।
 

बीबी मुखर्जी

बीरभूम इन समर, कपड़े पर डिस्टेम्पर, 26.8 X26.7 सेमी

बीबी मुखर्जी

द ब्रिज, कपड़े पर डिस्टेम्पर, 607 X47.5 सेमी

रामकिंकर बैज

सीस्केप ए, वाटर कलर, 27.3 X17 सेमी

रामकिंकर बैज

समर नून, बोरे पर ऑयल, गनी कलॉथ पर ऑयल, 122 X106.5 सेमी

नन्दलाल बोस

कृष्णचुरा फ्लारवर डिस्टेम्पर, 33 X68 सेमी

बीबी मुखर्जी

आदम और ईव, कोलाज, 21 X 33 सेमी

 

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