English Website हिन्दी वेबसाइट
एनजीएमए मुंबई  |  एनजीएमए बंगलुरू

Monday, December 18, 2017


हमारा परिचय  |  इतिहास  |  शोकेस  |  प्रदर्शनी  |  संग्रह  |  प्रकाशन  |  देखने की योजना  |  हमसे संपर्क करें

आप यहां हैं:  होम  -  शोकेस  -  कालीघाट पेंटिंग
शोकेस - कालीघाट पेंटिंग
कालीघाट चित्रकला 19वीं सदी के बदलते कलकत्ता के शहरी समाज की उपज है। कालीघाट मंदिर की बढ़ती महिमा के साथ यह ब्रिटिश शासन काल में कलकत्ता का तीर्थ-स्थल बन गया। यहां पारंपरिक पटुआ और अन्य शिल्पी समुदाय के सदस्यों ने मिल में तैयार कागज पर चित्रकारी की एक तीव्र पद्धति का विकास किया। कूची एवं कालिख से इन लोगों ने देवी-देवताओं, संभ्रात एवं सामान्य समाज के लोगों का बारीकी से बखूबी चित्रण किया। महिलाओं का प्रणय प्रधान चित्रण हुआ। नव धनाढ्यों के नाटकीय तौर-तरीकों पर कटाक्ष के चित्र बने। महिलाओं की शिक्षा की शुरुआत के साथ महिलाओं एवं पुरुषों की बदलती भूमिकाओं के चित्र बने।
 
 

लघुचित्र

तंजाउर एवं मैसूर

यूरोपियन पर्यटक कलाकार

कम्पनी काल

कालीघाट पेंटिंग

सैद्धान्तिक यथार्थवाद

बंगाल स्कूल

अमृता शेर-गिल

यामिनी राय

गगनेंद्रनाथ टैगोर

रवीन्द्रनाथ टैगोर

शांतिनिकेतन

सामूहिक कलाकार

भावप्रधान कला

1960 का कला आंदोलन

1970 का कला आंदोलन

समकालीन

आधुनिक मूर्तिकला

मुद्रण करना

फोटोग्राफी