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Wednesday, October 01, 2014


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इतिहास

कभी जिस भवन में सर कॉवसजी जहांगीर पब्लिक हॉल नाम से मशहूर सभागार था अब उसका रूख मात्र (आगे का हिस्सा) अपने पूर्व स्वरूप में बरकरार है। घोड़े के नाल के आकार की बाल्कनियों समेत अंदरूनी हिस्से का तो स्वरूप ही बदल गाया है। विशाल अंदरूनी भाग के मध्य में एक सीढ़ी जाती है और अलग-अलग उंचाई पर दिखती है गैलरियां। सर सी. जे. हॉल के नाम से लोकप्रिय इस स्थान को नैशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट, मुंबई के रूप में नया अवतार मिल गया है।

उदघाटन की सांध्य बेला में लोग बीते आधे दशक की महान कृतियों को निहारते रहे। यह प्रदर्शनी प्रोग्रेसिव आर्टिस्टस ग्रुप पर केंद्रित थी जो देश में समकालीन कला आंदोलन की धुरी रहा था। इस स्थान से परिचित पुराने जमाने के लोगों को येहुदी मेनहुइन, पॉल रॉबसन, और बॉम्बे सिम्फनी आर्केस्ट्रा की याद ताजा हो आई जिनके सुर-संगीत में सुध-बुध खोकर संभ्रात समाज की, संवरे बालों वाली महिलाएं बैठी रहतीं। गौरतलब है कि विश्व प्रसिद्ध संगीतज्ञ जुबीन मेहता के पिता मेहली मेहता बॉम्बे सिम्फनी आर्केस्ट्रा के संचालक हुआ करते। यही वो जगह है जहां स्वतंत्रता संग्राम के दिनों महात्मा गांधी, सरदार बल्लभभाई पटेल, जवाहर लाल नेहरू, मोहम्मद अली जिन्ना की आवाज गूंजा करती थी। बॉम्बे आर्ट सोसायटी की सालाना प्रदर्शनियां और पारसी पंचायत की बैठकें हुआ करतीं थी जिनके लिए स्वयं सर कॉसाजी जहांगीर ने विशेष प्रावधान कर रखा था। हालांकि नई पीढ़ी के समक्ष एक नए अवतार में यह इमारत आधुनिक भारतीय कला की सर्वश्रेष्ठ कृतियों की झलक देखाती आज मील के नए पत्थर कायम करने में संलग्न है। मुंबई को सर कॉवसजी जहांगीर के ऐतिहासिक योगदान स्वरूप सन 1911 में मिला सर सी. जे. हॉल सहित उनके परिवार द्वारा कम से कम चार अन्य भव्य इमारतों का योगदान भी उल्लेखनीय है।

कॉवसजी जहांगीर हॉल परिसर और इंस्टीटयूट ऑफ साइंस को ब्रिटिश वास्तुकार विटेट ने 19 लाख की लागात से बनवाया जबकि सर करीभाई इब्राहिम और सर जैकब सैसून ने शेष 11 लाख का योगदान दिया। एकमात्र सार्वजनिक सभागार के रूप में मौजूद टाउन हॉल के बाद बने इस नए हॉल ने महानगरी के सामाजिक जीवन पक्ष में व्याप्त खालीपन को दूर कर दिया। परिसर के उदघाटन के अवसर पर बोलते हुए लॉर्ड सेडनहेम ने कहा, ''बॉम्बे को इस बात का गर्व होना चाहिये कि इसमें इतने सारे अच्छे नागरिक हैं जो शहर की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से आगे आए हैं क्योंकि उन्हें अहसास है कि महान धरोहर के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारियां भी आती हैं।''

पचास के दशक तक सी.जे. हॉल संगीत सम्मेलनों, राजनीतिक बैठकों और कला की गतिविधियों का केंद्र रहा लेकिन जहांगीर आर्ट गैलरी और वातानुकूलित सभागारों जैसे तेजपाल, बिड़ला और पाटकर हॉल के निर्माण के साथ यह कुछ उपेक्षित हो गया। नए हॉल में प्रकाश एवं ध्वनि की बेहतर व्यवस्था होती। सी.जे. हॉल की उपेक्षा हुई तो उसका पतन होने लगा। साठ एवं सत्तर के दशकों में यह बॉक्सिंग प्रतिस्पर्द्धाओं का मूक साक्षी बना रहा। यहां ट्रेड यूनियन की बैठकें और फिर शादियों के जलसे होने लगे। चमड़े के सामानों एवं रेडीमेड कपड़ों के डिस्काउंट सेल भी लगने लगीं।

जाने-माने मूर्तिकार पीलू पोचकनवाला और कला मर्मज्ञ केकू गांधी के नेतृत्व में कला समुदाय ने जब कला से बाजार में पतन के विरुद्ध आवाज बुलंद कीया तो यह निर्णय लिया गया कि इस हॉल को समकालीन कला संग्रहालय बना दिया जाए। लेकिन लंदन के सुप्रिसद्ध रॉयल अल्बर्ट हॉल की रूपरेखा पर तैयार एक हॉल के विशाल उच्च-गुंबदाकार अंदरूनी भाग में फर्श के लिए जगह बनाना वास्तुकला की चुनौती थी। एक ओर ऐतिहासिक इमारत के बाहरी हिस्से के साथ छेड़-छाड़ न करने की कानूनी बाध्यता थी तो दूसरी ओर इस इमारत की रेत पर बनी नींव ही कमजोर पाई गई। दिल्ली के वास्तुकार रोमी खोसला द्वारा जो रूपांकन किया गया उसमें एक संरचना के अंदर दूसरी संरचना का प्रावधान था ताकि 5 प्रदर्शन गैलरियां बन सके जिनके बीच सागवान और क्रोमियम के बने मार्ग से आना-जाना हो सके। व्याख्यानों के लिए एक सभागार एक पुस्तकालय, कैफेटेरिया, कार्यालय और स्थायी संग्रह और चल-प्रदर्शनियों के आयोजन संबंधी सामानों के लिए भंडारगृह भी बनाए गए। 12 वर्ष और 3.5 करोड़ की लागत से पुनरुद्धार का काम पुरा हुआ और इसके साथ ही मुंबई को मिला एक संग्रहालय जो प्रकाश, नमी और तापमान नियंत्रण के लिहाज से अंतर्राष्ट्रीय स्तर का साबित हुआ। नई कला दीर्घा में होंगे नई पीढ़ी के लोग जो यहां कलाकारों एवं उनकी कृतियों की जानकारी से परिपूर्ण होकर चित्रकलाओं एवं मूर्तिकलाओं को निहारते रह जाएंगे।

नैशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट
सर कॉवसजी जहांगीर पब्लिक हॉल
एम.जी. रोड फोर्ट मुंबई- 400032

श्री एम. शंकर (संरक्षक)
टेलीः 022- 22881971
टेलीफैक्सः 022- 22852457

 

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